पाकिस्तान अपनाएगा 'यूक्रेन मॉडल'? विशेषज्ञों ने दी रूसी गलती से बचने की चेतावनी

मई 27, 2026

जब पाकिस्तान के सैन्य विश्लेषक इस्लामाबाद में बैठकर भविष्य के युद्ध की रणनीति बना रहे हैं, तो उनकी नजर सीधे रूस-यूक्रेन युद्धयूक्रेन पर टिकी है। हालिया रिपोर्ट्स से यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान भारतीय सेना के खिलाफ 'यूक्रेन मॉडल' को अपनाने की फिराक में है। लेकिन यही वक्त है जब रणनीतिकार सावधान हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंधाधुंध नकल करने से बेहतर है कि पाकिस्तान उस 'रूसी गलती' से बचे जिसने पूर्वी यूरोप में एक महाशक्ति को घुटनों पर ला दिया।

क्या कम तकनीक वाली ड्रोन सेना भारत जैसे शक्तिशाली पड़ोसी को चुनौती दे सकती है? या फिर यह एक ऐसी दांव-पेच होगी जो विपरीत असर करेगी? आइए समझते हैं कि इस 'यूक्रेन मॉडल' के पीछे क्या छिपा है और विशेषज्ञ इसे क्यों खतरनाक मान रहे हैं।

'यूक्रेन मॉडल' क्या है और पाकिस्तान क्यों चाहता है?

खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की नजर FPV (First Person View) ड्रोन और "nap of the earth" उड़ान तकनीक पर है। सरल भाषा में कहें तो, यह वे छोटी, सस्ती और तेज ड्रोन हैं जिन्हें यूक्रेन ने भारी हथियारों के बिना ही रूसी टैंकों को निशाना बनाया था। "Nap of the earth" का मतलब है जमीन की सतह के इतने करीब उड़ना कि राडार उन्हें पकड़े नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस रणनीति को इसलिए अपना रहा है क्योंकि वह अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के रणनीतिक फायदे को कम करना चाहता है। यह कोई नई सोच नहीं है; यह एक 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) का प्रयास है, जहां कमजोर पक्ष तकनीकी चालाकी से ताकतवर पक्ष को धोखा देने की कोशिश करता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह खेल भारत-पाक सीमा पर भी वैसा ही काम करेगा जैसा मैदानों में हुआ?

विशेषज्ञों की चेतावनी: रूस की गलती दोहराना मौत है

यहीं पर कहानी में एक मोड़ आता है। जबकि पाकिस्तान ड्रोन तकनीक पर जोर दे रहा है, रक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उनका तर्क है कि रूस ने यूक्रेन में कई गलतियां कीं, और अगर पाकिस्तान भी उनमें से किसी को दोहराता है, तो परिणाम भयानक हो सकते हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. पनाग, सेवानिवृत्त रक्षा विशेषज्ञ ने अपने विश्लेषण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने रूस की सबसे बड़ी ताकत—उसकी 'सूचना युद्ध' (Information Warfare) क्षमता—को कैसे परास्त किया, यह सबक है। पनाग का कहना है कि रूस ने शुरू में सोचा था कि वह सूचनाओं के जरिए युद्ध जीत लेगा, लेकिन यूक्रेन ने सोशल मीडिया और वास्तविक समय की रिपोर्टिंग के जरिए इसका जवाब दिया।

पनाग ने हिंदी में लिखते हुए कहा, "भारत में झूठी कहानियां हास्यास्पद लगती हैं।" इसका मतलब है कि भारतीय जनता और सेना अब डिजिटल युद्ध के प्रति सतर्क है। अगर पाकिस्तान केवल ड्रोन पर भरोसा करेगा और सूचना युद्ध की तैयारी नहीं करेगा, तो वह रूस की तरह ही 'समय से पहले अपने चरम बिंदु' पर पहुंच सकता है।

यूक्रेन का सबक: तीन हफ्ते में बदला गया माहौल

ऐतिहासिक संदर्भ देखें तो, जब 2022 में युद्ध शुरू हुआ, तो रूस ने सोचा था कि यह एक तीव्र अभियान होगा। लेकिन मात्र तीन हफ्तों के भीतर, स्थिति एक 'गतिरोध' (Stalemate) में बदल गई। यूक्रेन ने रूसी सेना के लिए एक ऐसा रोदा बन लिया जिससे वह आगे बढ़ नहीं पाया।

आंकड़े बताते हैं कि रूस ने अब तक 12 नए क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया है, लेकिन इसके बदले में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन ने अपने कुल क्षेत्रफल का लगभग 20% हिस्सा खो दिया है, जिसमें ज़ापोरिज्जिया, डॉनबास और ओडेसा के कई हिस्से शामिल हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि यह युद्ध अब केवल सीमाओं का नहीं रहा। यह 'शक्ति संतुलन' का युद्ध बन गया है। रूस लगातार यूक्रेन के रेलवे, ऊर्जा ढांचे और जल आपूर्ति पर हमले कर रहा है। मॉस्को अपनी शर्तों पर ही नतीजा चाहता है, लेकिन यूक्रेन की लचीली रणनीति ने इसे मुश्किल बना दिया है। पाकिस्तान के लिए सवाल यह है कि क्या वह भारत के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को इसी तरह निशाना बना सकता है, और क्या भारत का जवाब उतना ही कड़ा होगा?

ऊर्जा राजनीति: भारत-यूक्रेन संबंधों में नया मोड़

ऊर्जा राजनीति: भारत-यूक्रेन संबंधों में नया मोड़

इस सैन्य चर्चा के साथ-साथ, एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—ऊर्जा राजनीति। यूक्रेन ने घोषणा की है कि वह 1 अक्टूबर 2025 से भारत से डीजल आयात पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। इसका कारण? भारत अपनी जरूरतों का 35-40% कच्चा तेल रूस से खरीदता है।

यूक्रेन की ऊर्जा कंपनी एनकॉर (Encor) ने कहा है कि वह भारतीय डीजल की हर खेप की प्रयोगशाला में जांच करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसमें कोई रूसी तेल घटक नहीं है। अगस्त 2025 में, यूक्रेन ने भारत से 119,000 टन डीजल आयात किया था, जो उसके कुल आयात का 18% था।

यह कदम दिखाता है कि कैसे रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और द्विपक्षीय संबंधों तक फैल गया है। अमेरिका भी भारत पर दबाव बना रहा है कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करे, क्योंकि इसे यूक्रेन युद्ध को समर्थन देने के बराबर माना जाता है। इस जटिल ताने-बाने में, पाकिस्तान की रणनीति केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक कारकों से भी प्रभावित होगी।

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